नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो. रीतेश साह का चयन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में संचालित यूजीसी अंतर-विश्वविद्यालय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र की एसोसिएटशिप के लिए हुआ है। देशभर से चयनित केवल 99 शिक्षकों में प्रो. रीतेश साह का भी चयन हुआ है।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी, शिमला की ओर से जारी पत्र में प्रो. रीतेश साह को केंद्र के एसोसिएट के रूप में चयनित किए जाने की सूचना दी गई है। यह चयन देशभर के शिक्षकों के बीच निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।
प्रो. रीतेश साह को रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद तथा उत्तराखंड सरकार के सहयोग से पांच वित्तपोषित शोध परियोजनाएं पूर्ण की हैं।
उनके अकादमिक योगदान में छह पुस्तकें, एक मोनोग्राफ तथा 50 से अधिक शोध-पत्र शामिल हैं। उनके शोध-पत्रों में स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित शोध भी शामिल हैं। वे स्प्रिंगर नेचर की विभिन्न शोध-पत्रिकाओं के सहकर्मी समीक्षक के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।
प्रो. साह ने 11 पीएच.डी. शोधार्थियों का पर्यवेक्षण किया है तथा एमिटी विश्वविद्यालय में एक शोधार्थी के सह-मार्गदर्शक के रूप में भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में आमंत्रित व्याख्यान और अकादमिक वार्ताएं भी दी हैं।
प्रो. रीतेश साह वर्तमान में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलसचिव के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मानविकी एवं इतिहास के क्षेत्र में उनके अकादमिक कार्य और शोध अनुभव को देखते हुए यह एसोसिएटशिप उच्च शिक्षा, इतिहास एवं मानविकी के क्षेत्र में अकादमिक संवाद और शोध को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, प्रो संजय पंत, प्रो. दिव्या यू जोशी, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. एन जी साहू, प्रो. ललित तिवारी, डॉ पूरन सिंह अधिकारी, डॉ गगनडीप होती, डॉ अशोक कुमार, डॉ कुबेर गिनती, डॉ मनोज बिष्ट, डॉ दीपक, डॉ मोहित डॉ हृदेश आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की।





