जय गोल्ज्जू महोत्सव: मल्ला महल में हुआ ‘केवट प्रसंग’गीत नाटिका का भव्य मंचन,समर्पण तथा मानव समानता की सुंदर अभिव्यक्ति।

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अल्मोड़ा:-संस्कार सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण समिति अल्मोड़ा द्वारा सात दिवसीय आयोजित जय गोल्ज्यू महोत्सव २०२६ के पांचवे दिन त्रिपुरा सुंदरी महिला समिति अल्मोड़ा द्वारा केवट प्रसंग गीत नाटिका के मंचन ने किया दर्शकों को भाव विभोर।
केवट प्रसंग गीत नाटिका में श्री राम की भूमिका में काव्या गुरानी, लक्ष्मण की भूमिका में भारती जोशी,जानकी की भूमिका में सौम्या सनवाल,केवट तथा नट की भूमिका में संदीप नयाल,
मल्लाह की भूमिका में सुंदर सिंह जीना व पंकज भगत तथा नटी की भूमिका में सुनीता बिष्ट ने किया शानदार अभिनय।
संगीत गायन में पुष्पा तिवारी,गायत्री तिवारी, आदित्य गुरानी, दीपांशु तिवारी तबला वादन विशाल बोरा,एस.एस.कपकोटी ने किया मंत्रमुग्ध।
इस गीत नाटिका के निर्देशक रंगकर्मी बृजमोहन जोशी ने केवट प्रसंग गीत नाटिका‌ के विषय में श्रोताओं को बतलाया कि “त्रेता युग में केवट श्री राम के बाल सखा श्रंग्वेरपुर महाराज निषाद राज गुह्य के अनुचर थे केवट निषाद,भोई वंश,हरि वंश,मल्लाह जाति,कीर समाज से था और गंगा पार कराने का कार्य करता था! बृजमोहन जोशी ने बतलाया कि-अयोध्या काण्ड के अनुसार-सृष्टि के आरम्भ में केवट का जन्म कच्छप/कछुए की योनि में हुआ।उस समय सम्पूर्ण जगत जल मग्न था।तब क्षीरसागर में उसका जन्म कछुए की योनि में हुआ!वो अपने मोक्ष के लिए क्षीरसागर में शेष शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु के अंगूठे का स्पर्श करना चाहता था किन्तु शेष नाग की फुंकार के कारण नहीं कर पाया।उस योनि में उसकी भगवान विष्णु के प्रति अगाध आसक्ति थी।तब भगवान विष्णु ने उससे कहा था कि त्रेता युग में उसका यह संकल्प अवश्य पूर्ण होगा और भगवान श्री राम के वनवास के समय श्री राम के चरणों को पखार कर और उस चरणामृत का जलपान कर वह सकुटुम्ब बैकुंठ धाम को प्राप्त हुआ।
इस गीत नाटिका की परिकल्पना,संगीत,तथा निर्देशन रंगकर्मी बृजमोहन जोशी तथा सहायक निर्देशन रंगकर्मी अखिलेश थापा द्वारा किया गया।
इस गीत नाटिका के विषय में रंगकर्मी बृजमोहन जोशी ने दर्शकों को यह भी बतलाया कि उनकी सांस्कृतिक संस्था आयाम मंच नैनीताल द्वारा इस गीत नाटिका का पहला मंचन शरदोत्सव रानीखेत में 05-10-1982 को किया गया था। जोशी ने कहा कि इस गीत नाटिका का निर्माण उनके गुरु जी प्रदर्शन कला के मर्मज्ञ *रमेश चंद्र जोशी जी के निर्माण व निर्देशन में उनकी सांस्कृतिक संस्था हिमानी आर्ट नैनीताल के कलाकार के रूप में किया करते थे उसके बाद मेरे द्वारा इस गीत नाटिका की परिकल्पना संगीत व निर्देशन कर लगभग तीस मिनट की प्रस्तुति सांस्कृतिक संस्था आयाम मंच नैनीताल व हिमानी आर्ट के द्वारा की जाने लगी और अब तक देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस गीत नाटिका के पचास से अधिक तथा पिछ्ले तीस वर्षों से लगातार श्री राम सेवक सभा मल्लीताल नैनीताल की रामलीला में तथा इस वर्ष नव सांस्कृतिक सत्संग समिति शेर का डांडा मल्लीताल नैनीताल की रामलीला में दिनांक १५-१०-२०२६ को इस केवट प्रसंग गीत नाटिका का मंचन बृज मोहन जोशी के प्रशिक्षण व निर्देशन में किया गया।
इस गीत नाटिका में वस्त्र सज्जा कार के रूप में अखिलेश थापा,हेमा काण्डपाल तथा रूप सज्जा कार के रूप में राजुल बंसल,कृष्ण मोहन लोहनी, सौम्या सनवाल,बृजमोहन जोशी,अखिलेश थापा ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
इस गीत नाटिका के निर्माता व सहायक निदेशक अखिलेश थापा ने जय गोल्ज्यू महोत्सव समिति,श्री नन्दा देवी समिति अल्मोड़ा,सरकार की आली रामलीला समिति अल्मोड़ा, श्री राम लीला समिति धारानौला अल्मोड़ा ,व उपस्थित दर्शकों का विशेष आभार व्यक्त किया।
जय गोल्ज्यू महोत्सव समिति के सचिव प्रकाश बिष्ट ने कहा कि जय गोल्ज्यू महोत्सव का उद्देश्य कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत,लोक परम्पराओं और अगाध धार्मिक आस्था को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है।
इस उपलक्ष्य पर प्रकाश बिष्ट, ललित मोहन बिष्ट, प्रीति बिष्ट, लता तिवारी,रवि रौतेला, ममता खत्री आदि मौजूद रहे। संचालन भावना मल्होत्रा द्वारा किया गया।

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