भीमताल के ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी परिसर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर कार्यशाला, भारतीय दर्शन एवं नैतिक मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता।

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भीमताल:- ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी परिसर में बुधवार को भारतीय ज्ञान परंपरा (इंडियन नॉलेज सिस्टम्स-आईकेएस) पर सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला: अर्थ, विकास और महत्व’ है। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय दर्शन, नैतिक मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता को समझना तथा आधुनिक व्यावसायिक एवं प्रबंधन संबंधी चुनौतियों के समाधान में इनके उपयोग पर चर्चा करना है।

कार्यशाला का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर कंप्यूटर एप्लीकेशंस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार बुधानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को समझे बिना भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा अधूरी है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रचलित अनेक पारंपरिक पद्धतियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और महत्वपूर्ण ज्ञान समाहित है, जिनका व्यापक अध्ययन किया जाना आवश्यक है।

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उन्होंने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता को समझने का आह्वान किया। साथ ही, इस विरासत का अध्ययन करने, उसके विभिन्न पहलुओं को प्रमाणित करने और उसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए समर्पित प्रयास करने पर जोर दिया।

कार्यशाला के पहले अकादमिक सत्र में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी परिसर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री अविरल अवस्थी ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का परिचय एवं व्यावसायिक नैतिकता’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय दर्शन, वेद-पुराण, गणित, आयुर्वेद, सिद्ध चिकित्सा पद्धति, वास्तु शास्त्र, शिल्प शास्त्र, भारतीय भाषाओं एवं साहित्य सहित ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में भारत के योगदान की जानकारी दी। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की गौरवगाथा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है।

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उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक व्यावसायिक नैतिकता से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी संस्थान और संगठन की सफलता के लिए ईमानदारी, जिम्मेदारी और मूल्य आधारित निर्णय लेना आवश्यक है। भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांतों को अपनाकर अधिक नैतिक, जिम्मेदार और टिकाऊ व्यावसायिक व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान भारतीय शास्त्रीय ग्रंथों, सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक ज्ञान के आधुनिक प्रबंधन में उपयोग पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसमें महाभारत से प्रबंधन के गुर, स्वास्थ्य एवं कल्याण की पारंपरिक पद्धतियां, नेतृत्व एवं सुशासन तथा भगवद्गीता के माध्यम से नैतिक निर्णय लेने जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त पारंपरिक, जनजातीय एवं स्थानीय समुदायों की आजीविका पद्धतियों, लोकज्ञान, मिथकों, अनुष्ठानों, आध्यात्मिकता और विभिन्न विश्वास प्रणालियों के भारतीय ज्ञान परंपरा में योगदान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ इन सत्रों के माध्यम से यह समझने में मदद करेंगे कि पारंपरिक ज्ञान किस प्रकार नैतिकता, उद्यमिता, नवाचार और जिम्मेदार व्यावसायिक गतिविधियों को नई दिशा दे सकता है।

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कार्यशाला के उद्घाटन दिवस का समापन भीमताल परिसर के निदेशक के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को आगामी सत्रों में सक्रिय भागीदारी करने और प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया। भारत के गणितीय ज्ञान और द्विआधारी एवं दशमलव संख्या प्रणालियों के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से देश की समृद्ध बौद्धिक विरासत पर गर्व करने तथा प्राचीन ज्ञान को वर्तमान समय की चुनौतियों से जोड़कर देखने का आह्वान किया।

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