भूमियाधार जी.आई.सी में गांधी-शास्त्री जयंती पर विशेष आयोजन,चार दशकों से लोक संस्कृति के संवाहक बृजमोहन जोशी सम्मानित।

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नैनीताल:- नगर के निकटवर्ती क्षेत्र भूमियाधार के राजकीय इंटर कालेज में धूमधाम से मनाई गई महात्मा गांधी जी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं व शिक्षकों के द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई उसके बाद ध्वजारोहण राष्ट्र पिता महात्मा गांधी एवं देश के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों का अनावरण माल्यार्पण किया। विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक हीरा बल्लभ आगरी द्वारा संचालन किया गया।
आज के इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में रंगकर्मी व प्रसिद्ध छायाकार बृजमोहन जोशी व अतिथि महेन्द्र कुमार व हीरा लाल आगरी ने संचालन के साथ साथ महात्मा गांधी जी व लाल बहादुर शास्त्री जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार पूर्वक जानकारी विद्यार्थियों को दी गयी उन्होंने बतलाया कि शास्त्री जी जब प्रधानमंत्री बने तो पाकिस्तान के अयूब खान ने उनकी कद काठी का मजाक उड़ाया कि उनसे क्या मिलना उनकी कद काठी मेरे सामने कुछ भी नहीं वो ५ फीट २ इंच के इन्सान है तो मिडिया ने शास्त्री जी से जब इस सम्बन्ध में प्रश्न किया तो शास्त्री जी ने कहा कि वाकई मेरी उनकी कोई बराबरी नहीं है वो मेरे सामने सर झुकाकर बात करते हैं और मैं उनके सामने सर उठा कर बात करता हूं उनकी मेरी बराबरी हो ही नहीं सकती।
इसी श्रृंखला में स्कूल के शिक्षक नारायण सिंह महरा,विजय सिंह अधिकारी, हरीश कुमार पंचवाल, देवेन्द्र प्रसाद देवराड़ी,दीप चन्द्र हरबोला ,प्रयाग दत्त सोराड़ी,पूरन चंद्र, शिक्षका पूजा बिष्ट, द्वारा भी महात्मा गांधी जी व लाल बहादुर शास्त्री जी के कृतित्व व व्यक्तित्व महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों के साथ सांझा की गई।
आज के इस कार्यक्रम में राजकीय इंटर कालेज भूमियाधार नैनीताल के छात्र समर कुमार को प्रथम व छात्रा समीक्षा को चित्रकला विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए द्वीतिय पुरस्कार प्रधानाचार्य त्रिभुवन आर्य जी तथा मुख्य अतिथि बृजमोहन जोशी प्रदान किया गया।
इसके उपरांत छात्र छात्राओं ने भी सामूहिक रूप से राम धुन – रघुपति राघव राजा राम ….
तथा वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड परायी जाण रे…का गायन किया।

प्रधानाचार्य त्रिभुवन आर्य जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में आज आवश्यकता है कि हम महात्मा गांधी जी व लाल बहादुर शास्त्री जी के कृतियों से व्यक्तित्व से शिक्षा ग्रहण करें उन्होंने कहा कि – उस समय लाल बहादुर शास्त्री जी की तनख्वाह थी (५००) पांच सौ रुपये मात्र इसमें घर का खर्चा चलाना मुश्किल था तो उन्होंने अखबार में लेख लिखने आरम्भ किए।
भारत पाक युद्ध के समय अनाज कि कमी के कारण शास्त्री जी ने झुकना सही नहीं समझा और देश की जनता से आह्वान किया एक समय भोजन करने का जिसे जनता ने सहर्ष स्वीकार किया। और देश के स्वाभिमान को जिन्दा रक्खा।
अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए बृजमोहन जोशी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी की पहचान थी सादगी और ईमानदारी। सत्ता पाकर भी उन्हें कभी अभिमान नहीं हुआ।उनका स्वाभिमान था –
“हजारों लाखों लोगों के पेट भूखें हैं इस देश में लेकिन यहां खादी पहनकर लोग जागीरें बनाते हैं यदि है मुझमें बाजी जितने का पता मैं गुलदस्ते बनाता हूं वो समसीरें बनाते हैं।”
ऐसे थे शास्त्री जी जिनकी सादगी के हजारों उदाहरण है।
उन्होंने मात्र १८ महिने में ही पूरी दुनिया को बता दिया था कि उनका व्यक्तित्व उनके सिद्धांत कितने खाश हैं।पूरी दुनिया को उन्होंने सन्देश दिया था कि भारत पर अब अंगुली उठाने वालों का वो क्या हर्ष करेंगे।
“नापाक कदम उसके धरती से मिटा देंगे, देखा जो कभी उसने हस्ती को मिटा देंगे अब भारत के चमन पर निगाहें मत गढ़ाना क्योंकि इस बार कभी बोले तो बम से उड़ा देंगे “
आज के इस कार्यक्रम के मुख्य सहयोगी व्यवस्थापक थे दिनेश चंद्र ,
प्रधानाचार्य त्रिभुवन आर्य द्वारा विशेष रूप से सभी शिक्षकों का सहयोगियों का छात्र छात्राओं मुख्य अतिथि का अतिथि का आभार व्यक्त किया गया। तथा आज के इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बृजमोहन जोशी को उनके द्वारा पिछले चालीस वर्षों से व्यक्तिगत रूप से लोक संस्कृति के विविध आयामों को जीवंतता प्रदान करने के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

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