ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी,परिसर में “इनोवेशन एंड इट्स इमर्जिंग ऑपर्च्युनिटीज” विषय पर कार्यशाला, संशोधित मूल्यांकन नीति के निर्माण पर विस्तृत चर्चा।

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भीमताल:- ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में शुक्रवार को “जिज्ञासा-26” के अंतर्गत “इनोवेशन एंड इट्स इमर्जिंग ऑपर्च्युनिटीज” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संयुक्त रूप से आयोजन विश्वविद्यालय के आईपीआर सेल एवं सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस) द्वारा कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों एवं विशेषज्ञों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून परिसर से डीन रिसर्च डॉ. टीकम सिंह, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) समन्वयक डॉ. सुशीला दहिया, सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) के प्रमुख डॉ. अरुण राठौड़ तथा कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह उपस्थित रहे।

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कार्यशाला के दौरान डॉ. टीकम सिंह एवं डॉ. अनुपम सिंह ने आंतरिक मूल्यांकन रूब्रिक्स एवं संशोधित मूल्यांकन नीति के निर्माण पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने दक्षता आधारित मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत बनाने, पीयर लर्निंग को बढ़ावा देने तथा पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख शैक्षणिक मूल्यांकन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही नवाचार, विश्लेषणात्मक सोच एवं शोध गतिविधियों के माध्यम से शोध-उन्मुख शैक्षणिक संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. सुशीला दहिया ने NAAC दस्तावेजीकरण एवं गुणवत्ता मानकों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने संस्थागत रिकॉर्ड संधारण, प्रभावी दस्तावेजीकरण तथा NAAC दिशा-निर्देशों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। इस दौरान संकाय सदस्यों ने विश्वविद्यालय की NAAC तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए विचार-विमर्श भी किया।

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कार्यक्रम में डॉ. अरुण राठौड़ ने नवाचार एवं बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर रोचक एवं संवादात्मक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने खेल, प्रबंधन एवं तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार की विभिन्न अवधारणाओं और स्वरूपों को विस्तार से समझाया। साथ ही समस्या पहचान, आइडिया जनरेशन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट, प्रोटोटाइप निर्माण और प्रोसेसिंग सीमाओं के समाधान जैसे नवाचार चक्र के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से नवाचारों की सुरक्षा के उपायों पर भी प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम के अंत में भीमताल परिसर के निदेशक ने सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया तथा संकाय सदस्यों को आगामी पेटेंट राइटिंग हैंड्स-ऑन सत्र का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह सत्र प्रतिभागियों को पेटेंट ड्राफ्टिंग, नवाचार दस्तावेजीकरण एवं बौद्धिक संपदा फाइलिंग की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेगा।

कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता एवं ज्ञानवर्धक अनुभवों के साथ हुआ।

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