मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा अवैध एवं अपंजीकृत क्लीनिकों पर सख्ती, संस्थानों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई के दिए निर्देश।

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नैनीताल:- जनपद में बिना वैध पंजीकरण एवं निर्धारित चिकित्सकीय योग्यता के संचालित हो रहे क्लीनिकों/झोलाछाप चिकित्सा संस्थानों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने जनपद के समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को ऐसे संस्थानों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि, ‘उत्तराखंड राज्य में चिकित्सा संस्थानों का संचालन उत्तराखंड चिकित्सा स्थापना (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है। निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीकृत एवं मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के योग्य चिकित्सकों द्वारा ही चिकित्सा सेवाएं संचालित की जा सकती हैं’।

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उन्होंने निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में बिना पंजीकरण अथवा निर्धारित योग्यता के संचालित क्लीनिकों एवं झोलाछाप संस्थानों को स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तत्काल चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ऐसे संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ ही उन्हें बंद कर निगरानी में रखा जाए, ताकि दोबारा अवैध रूप से संचालन न हो सके।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर ₹50 हजार तक प्रथम दंड, ₹2 लाख तक द्वितीय दंड तथा ₹5 लाख तक के subsequent/तृतीय अपराध के लिए दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि अवैध रूप से संचालित चिकित्सा संस्थानों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आमजन से भी अपील की है कि उपचार कराने से पहले चिकित्सक की वैध योग्यता एवं क्लीनिक के पंजीकरण की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा किसी भी संदिग्ध या अवैध क्लीनिक की सूचना निकटतम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को दे।

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