प्रो.(कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार ग्रहण,शिक्षा,शोध, कौशल,नवाचार और छात्र-केंद्रित विकास को दी प्राथमिकता।

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नैनीताल:- सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति के रूप में अपना कार्यकाल पूर्ण करने के बाद प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने मंगलवार को कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। प्रो. बिष्ट की कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में नियुक्ति संबंधी आदेश राजभवन द्वारा 3 सितम्बर 2026 को जारी किया गया था।
कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने विश्वविद्यालय के डीन, निदेशकों एवं विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर विश्वविद्यालय की वर्तमान अकादमिक, प्रशासनिक एवं संस्थागत स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न विभागों एवं संस्थानों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों से संबंधित व्यवस्थाओं, शोध एवं नवाचार गतिविधियों तथा विश्वविद्यालय के समक्ष मौजूद प्राथमिक आवश्यकताओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।
इसके बाद कुलपति ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय की केंद्रीय पुस्तकालय का निरीक्षण किया। उन्होंने पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों, शोध-संसाधनों, ई-संसाधनों एवं विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के लिए उपलब्ध अकादमिक सुविधाओं की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने पुस्तकालय को विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं शोध संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इसके संसाधनों को विद्यार्थियों और शोधार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कुलपति प्रो. बिष्ट ने कहा कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय की समृद्ध अकादमिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उच्च स्तरीय अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की विकास यात्रा किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी, पूर्व विद्यार्थी और समाज की सामूहिक सहभागिता से आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक रोजगार परिदृश्य में उच्च शिक्षा की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ उपयोगी कौशल, व्यावहारिक अनुभव, उद्यमिता और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। इस दिशा में कुमाऊँ विश्वविद्यालय में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा के विस्तार को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा।
प्रो. बिष्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में ऐसे शैक्षणिक एवं कौशल कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनका संबंध स्थानीय आवश्यकताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय और वैश्विक अवसरों से हो। पर्यटन एवं आतिथ्य, कृषि एवं उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवाएँ, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाएँ, पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल, उद्यमिता तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में संभावनाओं को अकादमिक व्यवस्था से जोड़ने पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास में अनुसंधान और नवाचार को केंद्रीय भूमिका दी जाएगी। उत्तराखण्ड एवं हिमालय से जुड़े विषयों—पर्वतीय पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, जैव विविधता, जल संसाधन, स्वास्थ्य एवं वेलनेस, कृषि, पर्वतीय आजीविका और सतत विकास—पर केंद्रित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही उद्योग, शोध संस्थानों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को भी विस्तार दिया जाएगा।
कुलपति ने विश्वविद्यालय की मेरु परियोजनाओं तथा पटवाड़ानगर परिसर के विकास को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आधारभूत ढाँचे का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित न होकर उसे आधुनिक शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर केंद्रित होना चाहिए।
प्रो. बिष्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय में परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था की विश्वसनीयता, डिजिटल गवर्नेंस, प्रशासनिक दक्षता, मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण तथा गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। नैक , एनआईआरएफ तथा अन्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं संस्थागत व्यवस्थाओं को निरंतर बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की विकास प्रक्रिया का केंद्र बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की सफलता का अंतिम मानदंड यह होना चाहिए कि उसके विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शोध अवसर, कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण और भविष्य के रोजगार एवं उद्यमिता के लिए उपयुक्त वातावरण प्राप्त हो।
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य की अपनी भूमिका और जिम्मेदारी है। विद्यार्थी ज्ञान और अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान दें, शोधार्थी समाजोपयोगी एवं प्रभावकारी अनुसंधान करें, शिक्षक विद्यार्थियों के मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँ तथा अधिकारी एवं कर्मचारी संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करें। सामूहिक जिम्मेदारी और संस्थागत प्रतिबद्धता के माध्यम से ही विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
कुलपति ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण राज्य विश्वविद्यालय का नेतृत्व उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक सहभागिता, राज्य सरकार एवं उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग तथा उपलब्ध अकादमिक एवं संस्थागत क्षमताओं के प्रभावी उपयोग से कुमाऊँ विश्वविद्यालय को ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित एक सशक्त हिमालयी विश्वविद्यालय के रूप में और अधिक विकसित किया जा सकेगा।
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट पूर्व में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग में प्रोफेसर रह चुके हैं। इस प्रकार उनका विश्वविद्यालय से पूर्व का अकादमिक एवं संस्थागत जुड़ाव भी रहा है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. रजनीश पांडेय, प्रो. संजय पंत, प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. एस.एस. बरगली, प्रो. अतुल जोशी, प्रो. अमित जोशी, प्रो. रीना सिंह, प्रो. अनिता, प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. सावित्री कैडा जन्तवाल, प्रो. रीतेश साह, प्रो. महेन्द्र राणा, प्रो. एक एस लोधियाल, डॉ शिवांगी डॉ साशी डॉ संतोष डॉ नंदन डॉ. कुबेर गिनती डॉ मनोज बिष्ट डॉ मोहित रौतेला डॉ दीपक मेलकनी एल.डी. उपाध्याय, श्री मोहित सनवाल, श्री नंदाबल्लभ पालीवाल, श्री दीपक भूपाल करायत, छात्र नेता करण सती एवं जयवर्धन सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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