नैनीताल:-अखिल भारतीय साहित्य परिषद की नगर शाखा द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष होने पर सी.आर.एस. टी.के सभागार में ‘आत्म बोध से विश्वबोध’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया है। मुख्य अतिथि राजेश ने कहा कि देश को आजाद करने में वंदे मातरम् का योगदान अद्वितीय है तथा आज भी देशभक्ति का यह महत्व पूर्ण गीत है । कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ रेखा त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्र को वंदे मातरम् समर्पित है,युवाओं को इससे शिक्षा लेनी चाहिए । विशिष्ट अतिथि डॉ पुष्प लता जोशी ने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि है ।वंदे मातरम् का जोश की हमारी शक्ति को व्यक्त करता है।विशिष्ट अतिथि सौरभ पांडे से कहा कि जननी जन्म भूमि को प्रणाम देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जय का उद्घोष है । मुख्य वक्ताओं में प्रॉफ गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि जब हम स्वयं को समझते है तो राष्ट्र के लिए कार्य करते है । प्रॉफ ललित तिवारी ने कहा कि भौगोलिक सीमाओं से हटकर है देश जो हमारी पहचान है ।वंदे मातरम में में धरती माता को संपूर्ण शक्ति माना गया है ।डॉ माधव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि जब भारत गुलाम था तो भारत की लिए बलिदान देना का काम जिन्होंने किए उन्होंने वंदे मातरम् कहा । डॉ जगदीश पंत ने कहा कि राष्ट्र सबसे पहले है तथा 2047 में विकसित राष्ट्र तभी बन पाएगा जब हम वंदे मातरम के सीख से राष्ट्र के लिए कार्य करेंगे। आशा खाती ने कहा कि राष्ट्र का गौरव ,राष्ट्र की पहचान और भारतीयता का गुण है वंदे मातरम् ।संचालन दे बसंती रौतेला ने किया ।दीप प्रज्वलन से प्रारंभ कार्यक्रम में सभी वक्ताओं को शॉल उड़ाकर सम्मानित किया गया । वंदे मातरम् 1875 में 7 नवंबर को बंकिम चंद्र जी ने लिखा। 1882 में आनंद मठ में आया तथा 1896 में रवींद्र नाथ टैगोर ने इसे गाया तथा 1950 में राष्ट्र गीत का दर्जा मिला । राष्ट्र को पुनर्जीवित करने में राष्ट्र गान स्वतंत्रा का गीत बना ओर देश को आजाद कराया। कार्यक्रम में सी. आर.एस.टी. एवं बालिका विद्यामंदिर के विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रस्तुति दी,सामूहिक वंदे मातरम् गया। कार्य में प्रधानाचार्य मनोजपांडे,व्यास शबनम के साथ विनीता पाठक ,नीलम जोशी , बिसना साह,भावना कांडपाल, मुन्नी तिवारी,अंजू बिष्ट ,रेनू बिष्ट आदि शामिल रहे ।


