‘भीमताल झील कुमाऊँ की पहचान है। इसे कूड़ेदान न बनाकर संरक्षित किया जाए’: पूरन चंद्र बृजवासी।

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भीमताल:- मानसून शुरू होते ही भीमताल झील की स्वच्छता व्यवस्था की पोल खुल गई है। झील के किनारे गाद, प्लास्टिक, बोतलें और तमाम कूड़ा-कर्कट जमा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और सिंचाई विभाग की अनदेखी के चलते हर साल बरसात में शहर का कचरा सीधे झील में समा रहा है।

भीमताल झील के तट पर भारी मात्रा में गाद के साथ प्लास्टिक, थैलियां और अन्य कचरा जमा है। पानी का रंग भी मटमैला हो गया है। पर्यटन सीजन में आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों में इसको लेकर नाराजगी है।

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सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने कहा कि “हर साल मानसून से पहले नालियों की सफाई और झील में गिरने वाले नालों पर जाली लगाने का वादा किया जाता है, पर जमीनी हकीकत शून्य है। नगर पालिका का कचरा और बाजार का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के झील में जा रहा है। सिंचाई विभाग भी गाद निकालने में लापरवाह है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में झील से 3 कि.मी दूर हेड से शहर के बीचोंबीच होते झील किनारे ट्रेल तक ड्रेन से बहकर आने वाली गाद और शहर का कचरा झील कीगहराई कम कर रहा है। 1998 से अब तक झील की सफाई गाद निकासी का कार्य नहीं हुआ, इससे न सिर्फ झील का सौंदर्य खराब हो रहा है, बल्कि जलीय जीवन और पर्यटन पर भी असर पड़ रहा है।
बृजवासी ने जिला प्रशासन, नगर पालिका और सिंचाई विभाग से मांग की है कि,तत्काल झील की सफाई कर कचरा और गाद हटाई जाए शहर के नालों पर स्थाई जाली/ट्रैप लगाए जाएं झील संरक्षण की विशेष कार्ययोजना बनाकर उसे अमल में लाया जाए ।

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