रामनगर/नैनीताल:- नाबार्ड द्वारा समर्थित जनजातीय विकास निधि परियोजना के अंतर्गत जनपद नैनीताल के रामनगर विकासखण्ड में बुक्सा जनजाति परिवारों के सतत आजीविका विकास हेतु विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। परियोजना का संचालन प्रगतिशील संस्था द्वारा किया जा रहा है तथा यह परियोजना नाबार्ड द्वारा स्वीकृत की गई है। परियोजना की कुल लागत लगभग ₹2.50 करोड़ है, जिसमें नाबार्ड द्वारा लगभग ₹1.55 करोड़ का अनुदान समर्थन प्रदान किया गया है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा दिनांक 10 सितम्बर 2025 को स्वीकृति प्रदान की गई थी। परियोजना के अंतर्गत थारी, राजपुर, पिपलसाना, बेरिया एवं ललितपुर गांवों के जनजातीय परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत बाड़ी विकास, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, जल संरक्षण, महिलाओं के लिए स्वरोजगार गतिविधियाँ तथा क्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। परियोजना में 100 जनजातीय कृषकों को बाड़ी विकास से जोड़ा जाना प्रस्तावित है, जिसमें फलदार पौधों का रोपण, अंतर्वर्ती खेती तथा आजीविका संवर्धन गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 100 परिवारों को बकरी पालन इकाइयों से लाभान्वित किया जाना प्रस्तावित है।
इसी क्रम में दिनांक 14 मई 2026 को नाबार्ड नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक श्री मुकेश बेलवाल द्वारा परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण एवं अनुश्रवण भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान थारी गांव में परियोजना गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि परियोजना के अंतर्गत बकरी पालन गतिविधियों का संचालन प्रारम्भ कर दिया गया है तथा प्रथम चरण में 20 जनजातीय कृषकों को संतृप्त किया जा चुका है। चयनित लाभार्थियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत नस्ल की बकरियों से जोड़ा जा रहा है ताकि जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
निरीक्षण के दौरान यह भी अवलोकित किया गया कि बाड़ी विकास कार्यों के अंतर्गत भूमि तैयारी एवं गड्ढा खोदाई का कार्य प्रगति पर है। आगामी रोपण सत्र को ध्यान में रखते हुए फलदार पौधों के रोपण हेतु आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं। परियोजना के अंतर्गत पौधरोपण के साथ-साथ जल संरक्षण, जैविक खाद उपयोग तथा वन्य एवं आवारा पशुओं से सुरक्षा हेतु आवश्यक व्यवस्थाएँ भी की जा रही हैं।
श्री मुकेश बेलवाल ने भ्रमण के दौरान लाभार्थियों एवं परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि नाबार्ड की जनजातीय विकास निधि परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने परियोजना क्रियान्वयन संस्था को निर्देशित किया कि परियोजना कार्यों को स्वीकृत कार्ययोजना एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। साथ ही गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, पशुधन चयन, प्रशिक्षण एवं नियमित अनुश्रवण पर विशेष ध्यान देने को कहा।
भ्रमण के दौरान यह भी निर्देशित किया गया कि परियोजना के अंतर्गत कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य विभागीय योजनाओं के साथ अभिसरण स्थापित कर लाभार्थियों को अधिकतम लाभ पहुँचाया जाए। महिलाओं के लिए स्वरोजगार गतिविधियों, क्षमता विकास प्रशिक्षण एवं सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त बनाने पर भी विशेष बल दिया गया।
परियोजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को दीर्घकालिक बाड़ी आधारित आय स्रोत उपलब्ध होने के साथ-साथ अल्पकालिक आय हेतु बकरी पालन जैसी गतिविधियों का भी लाभ प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र में सतत आजीविका विकास को बढ़ावा मिलेगा।




