नैनीताल:- कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डी.एस.बी. परिसर स्थित इतिहास विभाग में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संग्रहालयों के महत्व, उनके इतिहास तथा वैश्विक लक्ष्यों में उनकी भूमिका से परिचित कराना था। कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. संजय घिल्डियाल के निर्देशन में किया गया।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस की वैश्विक थीम “Museums Uniting a Divided World” रही, जबकि इतिहास विभाग की विभागीय थीम “Himalayan Heritage: Bridging Histories, Cultures and Communities” निर्धारित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ शोध छात्र नीरज बिष्ट के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने विभाग के प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए संग्रहालयों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात शोध छात्र ऋषभ रावल ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से संग्रहालयों की भूमिका, उनकी रेजिलियंस तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से उनके संबंध को विस्तार से समझाया। उन्होंने डी.एस.बी. परिसर स्थित हिमालय संग्रहालय की विशेषताओं एवं ऐतिहासिक महत्व की भी जानकारी दी।
मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. संजय घिल्डियाल ने संग्रहालय शब्द की उत्पत्ति, उसके ऐतिहासिक विकास तथा विभिन्न प्रकार के संग्रहालयों की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल पुरावशेषों के संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों और मानवीय विकास के जीवंत दस्तावेज हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वर्ष 2015 में हिमालय संग्रहालय पर निर्मित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें संग्रहालय की स्थापना एवं विकास यात्रा को दर्शाया गया। इसके उपरांत छात्र-छात्राओं को हिमालय संग्रहालय का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्होंने उत्तराखंड एवं हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को निकट से देखा।
कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापक प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, प्रो. संजय कुमार टम्टा, प्रो. रीतेश साह, डॉ. शिवानी रावत, डॉ. मनोज बाफिला, डॉ. पूरन सिंह अधिकारी, डॉ. भुवन शर्मा एवं डॉ. वीरेन्द्र पाल सहित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर इतिहास विभाग द्वारा 18 मई से 1 जून तक 15 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें हिमालयी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी प्रदर्श सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।


