वाराणसी:- काशी की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ज्ञान परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए 14 जून रविवार को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के परिसर में ’37वीं सुदर्शन सभा’ का भव्य आयोजन सम्पन्न
हुआ। यह कार्यक्रम परिवर्तन योगेश संस्थान तथा उसके उपखण्ड ‘महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा’ एवं ‘महर्षि सत्य सनातन हिंदी विद्यापीठ’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। समारोह में देशभर से
आए संत-महात्माओं, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, समाजसेवियों तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियों ने सहभागिता की।
इस गरिमामय अवसर पर रघुकुल आर्यावर्त की संस्थापक, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की शिक्षाविद, पर्यावरण संरक्षण की अग्रदूत तथा बहुचर्चित ‘झोला अभियान’ की प्रेरक डॉ. अनुभा पुन्दीर को उनके उत्कृष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं पर्यावरणीय योगदान के लिए ‘राष्ट्रीय रत्न काशी महामना सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
समारोह का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब यह सम्मान डॉ. अनुभा पुन्दीर को उनकी पूज्य माता श्रीमती वीणा जी के करकमलों द्वारा प्रदान किया गया। उपस्थित जनसमूह ने इस दृश्य
का भावपूर्ण स्वागत किया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
डॉ. अनुभा पुन्दीर पिछले 14 वर्षों से ‘झोला अभियान’ के माध्यम से एकल- उपयोग प्लास्टिक के विरुद्ध जन-जागरूकता का कार्य कर रही हैं। उनका यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है,
बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वदेशी सोच, सतत जीवनशैली तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देता है।
मनोविज्ञान, भारतीय शास्त्र, संस्कृति, व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक चेतना के अद्भुत समन्वय के कारण डॉ. पुन्दीर का कार्य समाज के विभिन्न वर्गों में विशेष रूप से सराहा जाता है। वे अपने व्याख्यानों, लेखन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। डॉ. पुन्दीर के मार्गदर्शन में बच्चों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य, लोककलाओं और भारतीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया ।
डॉ. अनुभा पुन्दीर को इससे पूर्व भी अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मंचों, करमवीर सम्मान तथा TEDx जैसे मंचों पर उनके कार्यों की व्यापक सराहना की गई है।
काशी की पावन धरती पर प्राप्त ‘राष्ट्रीय रत्न काशी महामना सम्मान’ न केवल डॉ. अनुभा पुन्दीर की उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि समाज, संस्कृति और पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने
वाले सभी लोगों के लिए प्रेरणा है।



