नैनीताल:- श्री मां नयना देवी जन्म शताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर श्री मां नयना देवी अमर उदय ट्रस्ट द्वारा दिनांक १५ जून से २३ जून २०२६ तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सोमवार प्रातः हुआ विधिवत पूजन अर्चन। आचार्य – मोहन चंद त्रिपाठी सामवेदाचार्य, ब्रह्मा- मुकेश चन्द्र जोशी (शास्त्री), उप व्यास – गिरीश चंद्र तिवारी, तथा व्यास- पण्डित चन्द्रशेखर अधिकारी जी द्वारा हुआ पूजन आरम्भ।
मुख्य यजमान दीपक जोशी (बाबाजी) श्रीमती एवं श्री मनोज चौधरी।श्री मद्भागवत कथा का शुभारंभ व्यास जी पण्डित चन्द्रशेखर अधिकारी जी द्वारा मंगलाचरण के साथ आरंभ किया गया।
व्यास जी ने कहा कि नैनीताल में श्री मां नयना देवी शक्ति के रूप में विद्यमान है शक्ति का वाम नयन यहां गिरने से यह स्थान शक्तिपीठ है। नयना/ नैना वाम नेत्र नेत्रों वाली देवी जो ज्योति प्रदान करने वाली है जो स्वभाव को भी बदलती है। १०८ शक्ति पीठों में से एक हैं।
व्यास जी ने कहा कि भगवान की भक्ति उनकी कृपा से ही मिल सकती है। व्यास जी ने कहा कि अक्सर लोग कहते हैं कि श्रीमद्भागवत/ सत्संग करने से क्या लाभ होता है? व्यास जी ने कहा इससे अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है जीवन के दोष मिट जाते हैं लोभ,मोह ,मद और दंभ का नाश होता है। यही इस आयोजन का उद्देश्य भी है। मनुष्य देह में और पशु देह में यही अंतर है। व्यास जी ने आगे कहा कि रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि- बड़े भाग्य से जीवन में सत्संग प्राप्त होता है। संसार में कैसे रहना है इसका बोध हमें भगवान ही सिखलाते है। आत्म कल्याण आत्म रंजन के लिए हो।
राजा पृथु की कथा से आज की कथा आरम्भ की। व्यास जी ने कहा कि आज के सुख हमें गर्त में डाल रहे हैं। व्यास जी ने नैमिषारणय तीर्थ की महिमा का सुन्दर वर्णन किया। महर्षि व्यास,बदरी नाथ धाम,गणेश गुफा, व्यास गुफा में किस तरह व्यास जी ने १८ पुराणों की रचना की तथा महर्षि नारद जी की प्रेरणा से श्रीमद्भागवत का निर्माण दो भागों में किया पहले भाग में हरि की कथा श्रीमद्भागवत तथा दूसरे भाग में शक्ति श्रीमद् देवी भागवत की रचना की। समस्त पुराणों की रचना की।नैमिशारण्य तीर्थ की महिमा का वर्णन किया नैमिषारण्य तीर्थ में मां भगवती का ह्रदय गिरा है वह भी शक्ति पीठ है।इसे चक्र तीर्थ भी कहते हैं। काल गणना के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
व्यास जी ने आगे कहा कि हमें अपना दुःख भगवान से ही कहना चाहिए और किसी से नहीं।हर किसी के जीवन में आभाव होता है अगर रोना ही पड़े है तो भगवान के सामने रोना चाहिए।
वसुदेव की कथा सुनाई कि नारद जी के कहने से श्रीमद् देवी भागवत के पूजन से किस तरह श्रीकृष्ण शत्रा जीत के कलंक से बच पाए। इसके बाद व्यास जी ने व्यास शब्द के गूढ़ रहस्य को समझाया। व्यास जी ने कहा कि भगवान ही बिष्णु है और बिष्णु ही व्यास है।। व्यास जी ने यह भी कहा आज जगह जगह पुराण/ सत्संग खूब हो रहे हैं,खूब नाच गाना हो रहा है किन्तु पुराण क्या कह रहे हैं यह जानना आवश्यक है। इसके बाद गयासुर की कथा हयग्रीव राक्षस के बध को विस्तार पूर्वक समझा।
संगीत के कलाकारों के द्वारा कथा के आरम्भ में तथा कथा के मध्य सुंदर सुंदर भजनों का गायन किया गया संगीत कलाकारों में लोकेश पंत, पण्डित राधा कान्त शर्मा, कपिल जी ने सहभागिता की।इस शुभ अवसर पर श्री मां नयना देवी अमर उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह जी, घनश्याम लाल साह, प्रदीप साह, हेमंत साह,किशन नेगी, शैलेन्द्र मिलकानी,शैलेन्द्र साह,आचार्य बसन्त बल्लभ पाण्डे, बसन्त बल्लभ जोशी, चन्द्र शेखर तिवारी, नवीन तिवारी,भुवन काण्डपाल,गणेश बहुगुणा,अमिता साह,सुमन साह,मंजु रौतेला,दूबे जी उपस्थित रहे।
आभार:- बृजमोहन जोशी, नैनीताल।






