खटीमा:- हेमवती नंदन बहुगुणा राजकिय स्नातक महाविद्यालय खटीमा (उधम सिंह नगर) में मार्डन यूटोपियन सोसायटी खटीमा द्वारा आयोजित नवम सीमांत साहित्य उत्सव २०२६ का आयोजन किया गया।
यूटोपियन संस्था, यूटोपियन अथवा ‘यूटोपिया ‘ एक विचार है।एक विचार धारा,जो इसी दूनिया में एक दूसरी रचना के स्वप्न को लेकर चलती है।’यूटोपिया’ शब्द का प्रयोग संज्ञा और विशेषण दोनों रूपों में किया जाता है,और अक्सर इसे व्यंग के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है।१५१६ में सर टामस मूर ने एक किताब लिखी जिसका शीर्षक था “Utopia”इस किताब में उन्होंने एक ऐसे स्थान,अटलांटिक महासागर के बीच अवस्थित एक ऐसे टापू की कल्पना की है जो वास्तविकता में है ही नहीं लेकिन मानते हैं कि ऐसी जगह को होना चाहिए।एक ऐसी आदर्शवादी अवधारणा है जिसका उत्स हम प्लेटो के ” आदर्श राज्य ” के विचार में देखते हैं।कुल मिलाकर यह एक विचार के रूप में समानता, सहिष्णुता और सहभागिता की एक कल्पना है जिसे मूर्त रूप देने में सबको (खासकर उन लोगों को जो शिक्षित,विचार शील, तार्किक और आशावादी हैं) साथ मिलकर अपने स्तर से, अपने स्थान पर अपने सामर्थ्यानुसार कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए जो कि सबके लिए शुभ,सुंदर और सहज हो।इसी उद्देश्य को लेकर पिछले नौ वर्षों से यह संस्था खटीमा में प्रयासरत है।
और इस वर्ष भी इसी उद्देश्य को लेकर इस संस्था द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया।
आज के इस कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र – संस्था परिचय/दीप प्रज्वलन,महाविद्यालय छात्र संघ,पूर्व सैनिक संगठन, संस्था अध्यक्ष,सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुती- राजीव गांधी नवोदय विद्यालय द्वारा की गयी।
इस अवसर पर नैनीताल से आमंत्रित रंगकर्मी,संस्कृति कर्मी बृजमोहन जोशी द्वारा विषय – लोक साहित्य-परम्परा एवं संरक्षण विषय पर बोलते हुए कहा कि लोक साहित्य किसी भी समाज और उसकी संस्कृति की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होते हैं। जहां जैसी प्रकृति होती है वहां वैसा ही लोक होता है। आजकल लोक साहित्य के अन्तर्गत मौखिक और लिखित दोनों प्रकार के साहित्य का उल्लेख किया जाता है। लोक साहित्य जनता के लिए जनता के द्वारा रचित साहित्य है।और जन साहित्य जनता के लिए व्यक्ति विशेष के द्वारा रचित साहित्य है। उन्होंने यह भी बतलाया की विद्वानों ने लोक साहित्य को मुख्यतः छ: भागों में वर्गीकृत किया है। इसी सन्दर्भ में आगे बोलते हुए जोशी ने कहा कि हम विश्व में जहां भी जाते हैं वहां लगभग सभी क्षेत्रों में हमें लोक साहित्य इन्हीं रूपों में देखने को मिलता है।
परम्परा विषय पर बोलते हुए जोशी ने गायन के माध्यम से भी लोक गीतों, संस्कार गीतों, हुलेरी गीतों – बाल गीतों,कृषि गीतों की महत्वपूर्ण जानकारी दी। लोक गाथाओं, दन्त कथाओं की जानकारी के साथ साथ जोशी ने संस्कारों तथा कर्मकांडों में कुमाऊंनी लोक चित्रकला ऐपण के महत्व के साथ साथ वैदिक मंत्रोच्चार व मांगलिक संस्कार गीतों के साथ कैसे ऐपण कला जुड़ी हुई है उसे अनेक उदाहरणों के साथ समझाया ।
प्रथम सत्र में विषय – बच्चों में स्वलीनता (AUTISM)- में वक्ता डॉ. अनीता चौधरी, वार्ताकार डॉ.कमलेशअटवाल, मनीषा पन्त इस विषय पर चर्चा की गयी।इसी क्रम में इसके बाद लेखक एक परिचय-शैलेश मटियानी प्रस्तुती-डॉ.महेन्द्र प्रताप पाण्डेय द्वारा विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। नई पुस्तक पर चर्चा-लेखक-जगदीश पन्त (कुमुद)वार्ताकार हरीश शर्मा। विषय-नेपाल साहित्य जगत वक्ता-हरीशंकर जोशी आदि,वार्ताकार-चेतन भट्ट।
व्यक्तित्व-वक्ता-कर्नल(सेवा निवृत्त)बी.एस.रौतेला,वार्ताकार – मनमोहन जोशी,रविन्द्र पाण्डे, अभिन्नदन -पूर्व सैनिक संगठन कै.गम्भीर सिंह धामी,कुंवर सिंह खनका,रमेश सिंह रावत।
द्वितीय सत्र-में विषय-ए.आई. युग में साहित्य सृजन,वक्ता-डॉ. सिद्धेश्वर सिंह,डॉ.दिवा भट्ट, वरूण अग्रवाल,वार्ताकार-डॉ. कमलेश अटवाल,मनीषा पन्त।
तृतीय सत्र में विषय -लोक साहित्य व परम्पराओं का संरक्षण,वक्ता बृजमोहन जोशी, डॉ.अनिल कार्की,हेमा हर बोला, मधु शर्मा द्वारा विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी।
रतनपुर थारू हंस सांस्कृतिक जनकल्याण सेवा समिति एवं घुघुति जागर के सदस्यों के द्वारा बहुत ही मनमोहक लोक गीत एवं लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया गया।विशेष आकर्षण के रूप में मां पूर्णागिरी हस्त कला प्रदर्शनी भावना भट्ट-किताबों की दुनिया सीमांत क्षेत्र के लेखकों की किताबें विविध विधाओं के साहित्य का स्टाल लगाया गया था।इस अवसर पर डॉ. चंन्द्र शेखर जोशी,पूरन सिंह बिष्ट,चेतन भट्ट,ओपी पाण्डे, जगमोहन रौतेला, मनमोहन जोशी तथा अनेक साहित्यकार गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।




