नैनीताल:- देहरादून में 27 से 29 मार्च 2026 तक आयोजित तीसरे उत्तराखंड राज्य पैरालंपिक गेम्स में वैष्णवी बिष्ट ने प्रथम स्थान प्राप्त कर नैनीताल के साथ-साथ पूरे जनपद का नाम किया रोशन किया है।
वैष्णवी बिष्ट वर्तमान में मोहनलाल शाह बाल विद्या मंदिर की कक्षा 11 में अध्यनरत हैं पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी वह निरंतर प्रगति कर रही हैं। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है और कहा है कि वैष्णवी की यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
राज्य स्तरीय इस प्रतियोगिता में के सभी 13 जिलों के लगभग 150 दिव्यांग खिलाड़ी पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, पावरलिफ्टिंग, सिटिंग वॉलीबॉल और टेबल टेनिस जैसी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा विगत दिनों महाराणा प्रताप स्टेडियम, देहरादून में आयोजित 400 मीटर में वैष्णवी ने प्रथम स्थान प्राप्त करके स्वर्ण पदक प्राप्त किया है।
वैष्णवी की इस उपलब्धि के पीछे उनके कोच श्री निखिल आर्य और श्रीमती निहारिका गुसाईं,स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती अनुपमा साह और सभी शिक्षकों का विशेष योगदान रहा है। उनका कहना है कि हमेशा से ही उनके प्रिंसिपल और शिक्षकों ने उनको बहुत समर्थन दिया है. उनके योग्यदान और आशीर्वाद से वैष्णवी ने यहां तक का सफर तय किया है। उनके माता-पिता का भी विशेष योगदान है। उनके पिता संजय बिष्ट बिज़नेस मैन है और माता श्रीमती अनुभा बिष्ट सेंट जोसेफ कॉलेज में शिक्षिका हैं। वो हमेशा बच्ची को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कठिन परिस्थितियों और खेल की चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। वैष्णवी का कहना है कि परिवार का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
वैष्णवी के परिवार की खेल परंपरा भी प्रेरणादायी रही है। उनके दादाजी सुरेंद्र सिंह बिष्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने पटियाला से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा किया है और सेना में कोच के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी हैं। दादाजी की खेल भावना और अनुशासन से प्रभावित होकर ही वैष्णवी ने खेलों में अपना करियर बनाने का संकल्प लिया। यही कारण है कि आज वे अपनी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय स्तर तक पहुँची हैं।
कोच निखिल आर्य ने कहा कि वैष्णवी की मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हर परिस्थिति में उन्होंने हार न मानकर खुद को और बेहतर बनाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि आज वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
छोटी उम्र में मिली यह बड़ी उपलब्धि निश्चित ही न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे ज़िला के लिए गौरव का विषय है। वैष्णवी बिष्ट ने यह साबित कर दिया है कि यदि कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता। उनकी यह सफलता नैनीताल की बेटियों और उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
वैष्णवी की इस सफलता से पूरे नैनीताल और उत्तराखंड में हर्ष की लहर है।





