देहरादून:- टेडएक्स लुधियाना (TEDx GNDEC) के मंच पर डॉ. अनुभा पुंडीर ने अपने “झोला अभियान” के माध्यम से संवेदनशीलता (सस्टेनेबिलिटी), आदतों में बदलाव और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक आज हमारे पर्यावरण ही नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं।
डॉ. पुंडीर ने जोर देते हुए कहा कि बड़े बदलाव की शुरुआत छोटे कदमों से होती है। कपड़े के झोले का उपयोग जैसे सरल बदलाव अपनाकर हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उनका मानना है कि अगर हर व्यक्ति अपनी दैनिक आदतों में थोड़ा सा बदलाव लाए, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून में एसोसिएट प्रोफेसर और सामाजिक संगठन ‘रघुकुल आर्यावर्त ‘ की वाइस प्रेसिडेंट के रूप में वे लगातार जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही हैं।
उनका संदेश स्पष्ट है—
“जिम्मेदारी किसी बड़े प्रयास से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की छोटी आदतों से शुरू होती है।”



