कुमाऊँ विश्वविद्यालय में 52 शोध परियोजना प्रस्तावों की प्रस्तुति, गुणवत्तापूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा।

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नैनीताल:- कुमाऊँ विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत केयूआईएफआर-IV (2026-27) के तहत प्रस्तुत शोध परियोजना प्रस्तावों की प्रगति अनुश्रवण समिति (प्रोग्रेस मॉनिटरिंग कमेटी) की बैठक आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित कुलपति समिति कक्ष में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने दोनों दिनों प्रातः 10 बजे से अपराह्न 4 बजे तक की।
बैठक के दौरान विगत तीन वर्षों में विश्वविद्यालय स्तर पर संचालित शोध परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन भी किया गया। विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न शोध कार्यों की उपलब्धियों, प्रकाशनों, पेटेंट तथा सामाजिक उपयोगिता से जुड़े पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देना तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध की सशक्त संस्कृति विकसित करने के लिए इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रदान की गई शोध वित्तीय सहायता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं तथा अनेक शिक्षकों ने उच्च गुणवत्ता के शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और पेटेंट भी प्राप्त किए हैं।
उन्होंने बताया कि डॉ. कपिल खुल्बे ने भारत में पहली बार एक नई मशरूम प्रजाति की पहचान की, जबकि प्रो. मनोज आर्य ने तितली की नई प्रजाति खोजी तथा तितलियों पर पहली बार विस्तृत मैनुअल तैयार किया। इसी क्रम में डॉ. संतोष उपाध्याय द्वारा विकसित नई कल्चर तकनीक से कीड़ा जड़ी के उत्पादन में वृद्धि संभव हुई है। वहीं प्रो. एच. सी. एस. बिष्ट द्वारा नैनी झील में मत्स्य संवर्धन से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य किए गए। कुलपति ने कहा कि इस प्रकार के शोध कार्य विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
बैठक के दौरान विभिन्न विषयों से संबंधित शोध प्रस्तावों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की गई तथा चयनित परियोजनाओं को विश्वविद्यालय स्तर पर वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने पर विचार किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से विश्वविद्यालय में शोधोन्मुख वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा तथा इसके सकारात्मक परिणाम भविष्य में और व्यापक रूप में देखने को मिलेंगे।
बैठक में प्रो. आर. सी. जोशी, प्रो. एम. सी. जोशी, प्रो. एन. जी. साहू एवं डॉ. दीपक कुमार सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 52 शिक्षकों द्वारा अपने शोध परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुतिकरण देने वालों में प्रो. रीतेश साह, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. वीना पांडे, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. आशीष तिवारी, प्रो. सुषमा, प्रो. गीता, प्रो. मनोज, प्रो. अनीता पांडे तथा प्रो. शाहराज सहित अन्य संकाय सदस्य शामिल रहे।