आलेख:- बृजमोहन जोशी, नैनीताल।
नैनीताल:- इस वर्ष २०२५ आश्विन मास की नवरात्रि में प्रसिद्ध रंगकर्मी घनश्याम भट्ट जी के साथ मुझे भी अमर कंटक की इस यात्रा को करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।इस यात्रा से जुड़ी कुछ जानकारीयों को आपके साथ सांझा कर रहा हूं।
…. अमरकंटक में स्थित भारत का सबसे पहला श्रीयंत्र जिसे महामेरू यंत्र भी कहा जाता है।यह श्री यंत्र मंदिर सोनपुड़ा मार्ग, अमरकंटक जिला- अनुपपूर मध्यप्रदेश में स्थित है। पिछले बत्तीस वर्षों से इसका निर्माण कार्य चल रहा है। यह मंदिर वर्ष में एक बार ही खुलता है। श्रीयंत्र मंदिर एक प्राचीन मन्दिर है,जो यंत्र की पूजा के लिए समर्पित है, हिन्दू धर्म के अनुसार यंत्र ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधित्व करने वाला एक पवित्र ज्यामितीय आरेख है। माना जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण १२ वीं शताब्दी में “कलचुरी” काल के दौरान हुआ था। यह सम्पूर्ण मन्दिर ९०.००० वर्ग फुट के एक ऊंचे वर्गाकार चबुतरे पर बना है, और इसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई ५२ फुट है। इस मन्दिर की सबसे बड़ी विशेषता द्वार पर चार मुखों वाली ” देवी मुख मण्डल” देवी की विभिन्न मुद्रा – महालक्ष्मी,महासरस्वती,महा काली और भुवनेश्वरी को स्थापित किया गया है और इसके साथ साथ श्री गणेश, कार्तिकेय, द्वारपाल, और चौंसठ योगिनी को बनाया गया है।




