नैनीताल:- नैनीताल में नियमित वर्कचार्ज एवं दैनिक कर्मचारियों ने सांसद अजय भट्ट और विधायक सरिता आर्य को ज्ञापन देकर अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों की 30-40 वर्ष की सेवा करने के उपरान्त उत्तराखण्ड धामी जी की सरकार ने 16 जनवरी 2025 को नियमित वर्कचार्ज एवं दैनिक कर्मचारियों की पेंशन रोके जाने के सम्बन्ध में उत्तराखंड शासन ने एक तुगलकी फरमान के द्वारा एक शासनादेश जारी किया गया है जिसके कारण सिंचाई विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के दस हजार कर्मचारियों की जनवरी माह से पेंशन रोक दी गई है जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों का परिवार भुखमरी के कगार पर है कर्मचारियों द्वारा सरकार को बार-बार आंदोलन धरना प्रदर्शन व रैली से बार- बार चेतना की गई है परंतु सरकार व शासन में बैठे अधिकारियों पर इन बूढ़े बुजुर्गों माताओं और उनके परिवार जनों के लिए कोई रहम नहीं हो रहा है उत्तराखंड सरकार द्वारा 8 मई 2023 को अपने कैबिनेट में कर्मचारियों को पेंशन से वंचित करने का अध्यादेश पारित किया गया जबकि सरकार द्वारा यदि ऐसी कार्यवाही करनी थी तो सरकार 2018 में कैबिनेट की मंजूरी पेंशन नहीं दिए जाने के संबंध में शासनादेश लेना चाहिए था सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी गई कर्मचारियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court)लगाई गई माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मुख्य सचिव श्री ओम प्रकाश जी को उच्च न्यायालय में तलब किया गया जिस कारण कर्मचारियों को सेवा को जोड़ते हुए कर्मचारी की पेंशन एवं समस्त भुगतान किया गया विगत 8 वर्षों से कर्मचारी उस आदेश से पेंशन का भुगतान किया जा रहा था।
मान्यवर 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत इस बुढ़ापे में पेंशन को रोके जाने का कर्मचारियों व उनके परिवार पर आर्थिक संकट से गुजर रहा है यदि सरकार द्वारा कर्मचारियों
को पेंशन का भुगतान नहीं किया जाता है तो कर्मचारियों व उनका परिवार आत्मदाह करने को वाद्य होगा जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार व जिला प्रशासन/लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों की होगी।



