कर्मचारी व उनके परिवार भूखमरी के तगार पर, कर्मचारी विरोधी है वर्तमान सरकार : गिरीश चन्द्र जोशी

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नैनीताल:- उत्तराखण्ड के हजारों नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों द्वारा शासनादेश की होली जलाने का निर्णय नैनीताल गांधी चौक पर लिया गया है। नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ के मुख्य संयोजक गिरीश चन्द्र जोशी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के नियमित /वर्कचार्ज कर्मचारी उत्तराख्ण्ड सरकार के आदेशों के बाद पेशन के दायरे से बाहर हो गये है। जो कर्मचारी 1980 से लेकर 2025 तक कार्यरत थे जो सेवानिवृत्त हो चुके है तथा उनके मृतक आश्रितों को सरकार द्वारा आज तक नियमित नहीं किया गया है जो कि आर्थिक संकट गुजर रहे हैं तथा भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर्मचारी विरोधी सरकार है उत्तराखण्ड के हजारों नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों ने इस शासनादेश की होली जलाने का निर्णय नैनीताल गांधी चौक पर लिया गया है। तथा प्रदेश के सभी वर्गों के कार्यरत कर्मचारियों से विन्रम निवेदन है कि इस कर्मचारी विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। पूरे प्रदेश के कर्मचारी एक संगठन के नीचे आकर इस सरकार के खिलाफ चरणवध तरीके से आंदोलन की रूपरेखा तय करे तथा कर्मचारियों की एकता को बाध्य होये तथा जो कर्मचारियों 2023 से आज तक सेवानिवृत्त हो चुके है। उन कर्मचारियों को सरकार व विभाग द्वारा आज तक पेंशन तथा अन्य देयकों का भुगतान नहीं किया गया है। जिस कारण कर्मचारी व उनके परिवार भूखमरी के तगार पर है तथा आत्महत्या करने को बाध्य है। यदि सरकार द्वारा कर्मचारी विरोधी ये काला शासनादेश वापस नहीं लिया जाता है तो कर्मचारी व उनके परिवार आत्महत्या को बाध्य होंगे जिसकी जिम्मेदारी उत्तराखण्ड सरकार व मुख्यमंत्री जी की होगी, सरकार द्वारा कर्मचारियों को आजतक कुछ भी नहीं दिया गया कर्मचारियों को जो भी वेतन या भत्ते मिल रहे थे माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड व सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली द्वारा दिया गया था। सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय की अवमाना करी है। जिसकी कर्मचारी घोर निंदा करते है कर्मचारियों में इस शासनादेश व सरकार के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

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श्री जोशी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तराखण्ड 2017 से लेकर 2026 तक कर्मचारी विरोधी रहे जबकि लोकनिर्माण विभाग के कुमाऊ क्षेत्र में 500 कर्मचारियों के रिक्त पद है उन पदो पर भी आज तक वर्कचार्ज व दैनिक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया तथा लोक निर्माण विभाग की सरकारी जमीन व सरकारी आवासो पर सेवानिवृत्त व बाहरी कर्मचारियों द्वारा अतिक्रमण किया गया है इस संबंध माननीय मुख्यमंत्री जी को कई बार प्रेषित किये गये तथा माननीय मुख्यमंत्री जी की हेल्प लाइन में भी कई बार अवगत कराया गया है इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के आदेश पहले से जारी है इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 8 वर्ष बीतने उपरांत भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी। सिर्फ कर्मचारी के विरूद्ध काला शासनादेश जारी करा गया है। तथा कर्मचारियों को गोल्डन कार्ड की सुविधाओं से वंचित किया गया है। जिस कारण पूरे प्रदेश में कार्यरत व सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों भारी रोष व्याप्त है। कर्मचारियों द्वारा सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूक दिया जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी उत्तराखण्ड सरकार व माननीय मुख्यमंत्री जी की स्वयं होगी।

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