कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल की विद्या परिषद की बैठक का आयोजन, शोध प्रकाशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु दिशा-निर्देशों को स्वीकृति।

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नैनीताल:- कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल की विद्या परिषद की बैठक का आयोजन दिनांक 27 फरवरी, 2026 को किया गया।
बैठक में प्रारम्भिक कार्यवाही के अंतर्गत विद्या परिषद के सभी सदस्यों का स्वागत किया गया तथा पूर्व बैठक दिनांक 24 अगस्त, 2025 के कार्यवृत्त की पुष्टि/सत्यापन किया गया। साथ ही, दीक्षांत समारोह से संबंधित 30 अक्टूबर, 2025 की बैठक में की गई कार्यवाही की समीक्षा प्रस्तुत की गई तथा विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की बैठक दिनांक 26 फरवरी, 2026 के कार्यवृत्त अनुमोदनार्थ परिषद के समक्ष रखे गए।
बैठक में विश्वविद्यालय में शैक्षिक वर्ग की नियुक्ति एवं पदोन्नति के प्रयोजनार्थ शोध प्रकाशनों की मान्यता से संबंधित दिशा-निर्देशों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। परिषद को अवगत कराया गया कि गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मानकों, विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा के प्रमुख सूचक होते हैं। उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने हेतु शोध प्रकाशनों के मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत एवं पारदर्शी ढांचा विकसित किया गया है, जिसे उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार किया गया है।
जेड इस संदर्भ में कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत द्वारा प्रो. आर. सी. जोशी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसमें अन्य विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया गया। समिति की संस्तुतियों के अनुसार विज्ञान संकाय के लिए नियुक्ति एवं पदोन्नति हेतु केवल स्कोपस /एससीआई सूचकांकित जर्नलों में प्रकाशित शोध पत्रों को मान्य किया जाएगा।
कला एवं मानविकी विषयों के लिए स्कोपस सूचकांकित जर्नलों के अतिरिक्त चयनित गुणवत्ता-आधारित जर्नलों की एक पृथक सूची तैयार की गई है, जिसे “कुमाऊँ यूनिवर्सिटी लिस्टेड जर्नल्स ” नाम दिया जाएगा। इस सूची के निर्माण में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया, ताकि केवल प्रमाणिक एवं गुणवत्ता-सम्पन्न शोध पत्रिकाओं को ही सूचीबद्ध किया जा सके।
साथ ही, पुस्तकों के प्रकाशन के संबंध में भी दिशा-निर्देश विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय के शिक्षकगण केवल प्रतिष्ठित और गुणवत्ता-आधारित प्रकाशनों में ही अपनी शोध कृतियाँ प्रकाशित करें।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. रावत ने विद्या परिषद को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता और गुणवत्ता आधारित शोध प्रकाशनों के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा का मूल आधार होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रकाशनों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, प्रामाणिकता और सामाजिक उपयोगिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विद्या परिषद ने दिशा-निर्देशों पर सहमति व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
बैठक का संचालन कुलसचिव डॉ. एम. एस. मन्द्रवाल द्वारा किया गया। यह बैठक हाइब्रिड मोड में सम्पन्न हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, प्रोफेसरगण एवं विभागाध्यक्षगण तथा आमंत्रित सदस्य उपस्थित रहे।

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